
देवी लक्ष्मी कौन हैं?
अपनी कृपा, सौंदर्य और धन के लिए विख्यात देवी लक्ष्मी माता हिंदू धर्म की सबसे प्रमुख देवियों में से एक हैं। उनसे जुड़े अनेक गुण हैं, लेकिन उन्हें मुख्य रूप से सौभाग्य, धन, आनंद और सौंदर्य की देवी के रूप में देखा जाता है। देवी सरस्वती और देवी पार्वती के साथ त्रिदेवी समूह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होने के अलावा, उन्हें शुक्र ग्रह का अवतार माना जाता है। भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों में, जब उन्हें ब्रह्मांड के विकास में सहायता की आवश्यकता थी, तब उन्हें लक्ष्मी द्वारा उनकी रक्षा करते हुए देखा गया है। हिंदू धर्म में उन्हें भौतिक धन की स्वामी देवी के रूप में सबसे अधिक जाना जाता है।
देवी लक्ष्मी की छवि सचमुच दिव्य और शक्तिशाली प्रतीत होती है। उन्हें कमल पर बैठे या खड़े हुए दर्शाया गया है, उनके हाथों में दो अन्य कमल हैं। हिंदू संस्कृति में, कमल को सद्गुण, आत्मज्ञान और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। भारत के विभिन्न भागों में पाए जाने वाले ये फूल कठोरतम परिस्थितियों में भी पनप सकते हैं, सूखे और वायु प्रदूषण का सामना कर सकते हैं। आध्यात्मिकता में, ये इस बात का प्रतीक हैं कि अच्छाई बुराई पर बिना किसी प्रतिकूल प्रभाव के विजय प्राप्त करती है। प्रत्येक फैले हुए हाथ में दो कमल धारण किए हुए, देवी लक्ष्मी अत्यंत सुंदर बनी रहती हैं और अपने समर्पित पति भगवान विष्णु की स्तुति सुनती हैं, जिनसे वे अनंत काल तक निःशर्त प्रेम करती हैं।
लक्ष्मी माता जी की आरती के बारे में सब कुछ
लक्ष्मी जी की आरती एक बहुत ही लोकप्रिय आरती है। यह एक प्रकार की पूजा और प्रार्थना है, जिसमें दीया जलाया जाता है और साथ में गीत या मंत्रों का जाप किया जाता है। आरती शब्द संस्कृत शब्द ‘आर्ति’ से आया है, जिसका अर्थ है – पूजा, आराधना, सम्मान, अभिवादन या प्रार्थना। आपकी मनोकामनाओं की पूर्ति की आशा में, लक्ष्मी जी की आरती नीचे दी गई है।
लक्ष्मी जी की आरती के बोल:
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निश दीन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥
॥ जय लक्ष्मी माता
उमा राम ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता ।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गता ॥
॥ जय लक्ष्मी माता
दुर्गा रूप निरंजनी, सुख संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता, रिद्धि-सिद्धि धन पात ॥
॥ जय लक्ष्मी माता
तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भाव निधि की त्राता ॥
॥ जय लक्ष्मी माता
जिस घर में तुम रहती, तह सब सद्गुण आता ।
सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता ॥
॥ जय लक्ष्मी माता
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता ।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥
॥ जय लक्ष्मी माता
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि जटा ।।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पता ॥
॥ जय लक्ष्मी माता
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई जन गता ।
उर आनंद समता, पाप उतर जाता ॥
॥ जय लक्ष्मी माता ॥
आरती श्री गणेश जी की
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय…
एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय…
हार चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥ जय…
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥ जय…
FAQs
1. लक्ष्मी जी की आरती कौन-सी है?
मां लक्ष्मी की प्रसिद्ध आरती “ॐ जय लक्ष्मी माता” है। भक्त इसे माता लक्ष्मी की पूजा के समय श्रद्धा के साथ गाते हैं।
2. लक्ष्मीमाता की आरती कब करनी चाहिए?
मां लक्ष्मी की आरती सुबह और शाम पूजा के समय की जा सकती है। विशेष रूप से शुक्रवार और दीपावली के दिन आरती का महत्व माना जाता है।
3. लक्ष्मी जी की आरती किस दिन करनी चाहिए?
मां लक्ष्मी की आरती किसी भी दिन की जा सकती है, लेकिन शुक्रवार और दीपावली के दिन विशेष रूप से पूजा की जाती है।
4. लक्ष्मी माता की आरती कैसे करें?
सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करें। मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं, फूल और प्रसाद अर्पित करें और फिर श्रद्धापूर्वक आरती करें।
5. लक्ष्मी जी की आरती कितनी बार करनी चाहिए?
लक्ष्मी माता की आरती एक या अधिक बार अपनी श्रद्धा और पूजा की परंपरा के अनुसार कर सकते हैं।
6. क्या शुक्रवार को लक्ष्मीमाता की पूजा करनी चाहिए?
हां, हिंदू मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।
7. लक्ष्मी जी की आरती पढ़ने से क्या लाभ होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां लक्ष्मी की आरती करने से घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

